दिल्ली में स्वाइन फ़्लू का ख़तरा: तेज़ी से फैलते H1N1 से कैसे बचें
Ashlesha Thakur
राजधानी दिल्ली में मानसून के दौरान मौसम सुहावना तो होता है, लेकिन इसके साथ ही कई मौसमी बीमारियों का ख़तरा भी बढ़ जाता है. इस सीज़न में H1N1 यानी स्वाइन फ़्लू (Swine Flu) के मामलों में अचानक तेज़ी देखी गई है. दिल्ली में स्वाइन फ़्लू के कई मरीज़ों में रेस्पिरेटरी फ़ेलियर जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आ रही हैं.
सीके बिड़ला हॉस्पिटल®️ (CK Birla Hospital), दिल्ली के डायरेक्टर एवं पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. विकास मित्तल ने इस बीमारी की वजहें, म्यूटेशन के दावों और बचाव के अचूक उपायों पर विस्तार से जानकारी दी है. आइए समझते हैं कि इस बार स्वाइन फ़्लू इतना हावी क्यों हो रहा है.
क्या H1N1 मामलों में अचानक आई तेज़ी के लिए मौसमी कारण ज़िम्मेदार हैं?
मानसून के दौरान मौसम में काफ़ी बदलाव होता रहता है. कभी बहुत ज़्यादा गर्मी और नमी होती है, तो कभी बारिश के बाद तापमान अचानक गिर जाता है. डॉ. मित्तल के अनुसार, ऐसे मौसम में लोग अक्सर घरों या बंद जगहों में ज़्यादा समय बिताते हैं, जहां वेंटिलेशन कम होता है और संक्रमण आसानी से एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है.
हालांकि, सिर्फ़ नमी या तापमान को H1N1 के बढ़ते मामलों की इकलौती वजह नहीं माना जा सकता. इसके पीछे वायरस का फैलाव, लोगों की कमज़ोर इम्युनिटी, वैक्सीनेशन की कमी और क्लोज़ कॉन्टैक्ट जैसे कई कारण ज़िम्मेदार होते हैं.
क्या H1N1 वायरस में हुआ है कोई नया म्यूटेशन?
लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्वाइन फ़्लू का वायरस पहले से ज़्यादा ख़तरनाक हो गया है? ICMR से संबंधित ताज़ा मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फ़िलहाल जो H1N1 स्ट्रेन चल रहा है, उसमें कोई नया म्यूटेशन या महत्वपूर्ण एंटीजेनिक बदलाव नहीं देखा गया है. बीमारी की गंभीरता वायरस से ज़्यादा मरीज़ की स्थिति पर निर्भर करती है. ख़ासकर उनकी उम्र, पहले से मौजूद बीमारियां, इम्युनिटी और निमोनिया या सांस लेने में तकलीफ़ जैसी जटिलताएं यह तय करती हैं कि संक्रमण कितना गंभीर होगा.
अस्पतालों की तैयारी और रेस्पिरेटरी फ़ेलियर का ख़तरा
रेस्पिरेटरी इंफ़ेक्शन के मामले बढ़ने पर अस्पतालों की ज़िम्मेदारी और तैयारी बेहद अहम हो जाती है. डॉ. मित्तल बताते हैं कि गंभीर मामलों की निगरानी के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड, वेंटिलेटर और क्रिटिकल केयर की टीम का तैयार रहना ज़रूरी है.
जिन मरीज़ों में ऑक्सीजन लेवल गिर रहा हो या वायरल निमोनिया के लक्षण हों, उनका समय रहते इलाज करना बहुत ज़रूरी है. हालांकि, राहत की बात यह है कि हर H1N1 मरीज़ में रेस्पिरेटरी फ़ेलियर नहीं होता, समय पर इलाज मिलने से ज़्यादातर लोग पूरी तरह ठीक हो जाते हैं.
हाई-रिस्क वर्ग के लिए ज़रूरी सावधानियां
बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों (हाई-रिस्क वर्ग) पर शुरुआत से ही ज़्यादा ध्यान देना ज़रूरी है. इनमें फ़्लू तेज़ी से गंभीर रूप ले सकता है. निम्नलिखित लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें:
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लगातार और तेज़ बुखार आना.
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सांस लेने में परेशानी महसूस होना.
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ज़्यादा खांसी आना और ऑक्सीजन लेवल कम होना.
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बहुत ज़्यादा कमज़ोरी और थकान.
ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत मेडिकल मदद लें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर एंटीवायरल दवाएं जल्दी शुरू की जा सकें.
घरों में संक्रमण रोकने और आइसोलेशन के नियम
अगर परिवार में किसी को फ़्लू या H1N1 है, तो संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए आइसोलेशन सबसे अच्छा हथियार है.
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संक्रमित व्यक्ति को कुछ दिनों तक घर पर रहकर दूसरों से (ख़ासकर बुज़ुर्गों और हाई-रिस्क लोगों से) दूरी रखनी चाहिए.
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कमरे में ताज़ी हवा का वेंटिलेशन अच्छा होना बहुत ज़रूरी है.
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खांसते या छींकते समय हमेशा मुंह और नाक ढकें.
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मरीज़ और देखभाल करने वाले, दोनों नियमित रूप से हाथ धोएं और ज़रूरत पड़ने पर मास्क पहनें.
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घर में जिन चीज़ों को बार-बार छुआ जाता है (जैसे दरवाज़े का हैंडल, रिमोट), उन्हें अच्छी तरह साफ़ रखें.
क्या मौसमी फ़्लू वैक्सीन असरदार है?
हां, मौजूदा फ़्लू वैक्सीन इस समय चल रहे प्रमुख H1N1 स्ट्रेन के ख़िलाफ़ प्रभावी है. वैक्सीन लेने के बाद संक्रमण पूरी तरह से रुक जाए, यह ज़रूरी नहीं है, लेकिन इससे बीमारी के गंभीर होने और निमोनिया जैसी जटिलताओं का ख़तरा काफ़ी कम हो जाता है.
डॉक्टर सलाह देते हैं कि ख़ासकर बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, पहले से बीमार लोगों और हेल्थकेयर वर्कर में वैक्सीनेशन को बढ़ावा देना चाहिए. इससे मरीज़ सुरक्षित रहेंगे. साथ ही, अस्पतालों पर पड़ने वाले अचानक दबाव को भी कम किया जा सकेगा.
बचाव ही है सबसे बेहतर इलाज
स्वाइन फ़्लू से बचाव के लिए सबसे ज़रूरी है कि हम ज़िम्मेदार बनें. अपनी रेस्पिरेटरी हाइजीन का ध्यान रखें, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर बेवजह जाने से बचें और मौसमी फ़्लू वैक्सीन ज़रूर लगवाएं. अगर आप बीमार हैं, तो घर पर रहें और दूसरों को संक्रमित होने से बचाएं. सही जानकारी और समय पर लिया गया एक्शन आपको और आपके परिवार को इस मानसून सीज़न में सुरक्षित रख सकता है.