• Zindagi With Richa
  • 10 May, 2026
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Mother’s Day: ‘परफ़ेक्ट माँ’ बनने की होड़ में अपनी मानसिक सेहत न खोएं

Ritu Bhardwaj

Mother’s Day: मदर्स डे आते ही चारों तरफ़ माँ के त्याग, बलिदान और उसकी महानता के क़िस्से सुनाए जाने लगते हैं. हमारे समाज में एक “अच्छी माँ” बनने का आदर्श इतना ऊंचा रखा गया है कि कई महिलाएं इस उम्मीद को पूरा करने के चक्कर में अपनी ही मानसिक सेहत की क़ीमत चुका रही होती हैं.

लेकिन आज, इस मदर्स डे पर एक सच स्वीकार करने की बहुत ज़रूरत है, एक थकी, टूटी हुई और अंदर से दुखी माँ, कभी भी एक संपूर्ण माँ नहीं हो सकती.

क्या आप भी “परफ़ेक्ट माँ” बनने की कोशिश में थक चुकी हैं?

सुबह उठकर बच्चों के टिफ़िन बनाने से लेकर, उनके स्कूल प्रोजेक्ट्स, घर की साफ़-सफ़ाई और रात को उनके होमवर्क तक… हर चीज़ में परफ़ेक्शन की कोशिश! इस पूरी दौड़ में आप ख़ुद को हमेशा सबसे आख़िर में रखती हैं और अपनी भावनाएं दबाती रहती हैं.

क्या आप भी बिलकुल इसी दिनचर्या में जी रही हैं? अगर हाँ, तो आज एक पल के लिए रुकिए और ख़ुद से पूछिए: क्या आपका अपना मन, आपका अपना स्वास्थ्य मायने नहीं रखता?

क्या अच्छी माँ बनने का मतलब ख़ुद को खो देना है?

हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि माँ भी एक इंसान होती है. वो भी थकती है, उसकी भी भावनाएं होती हैं, और उसे भी दर्द होता है. लेकिन जब हम केवल “परफ़ेक्ट माँ” बनने पर ध्यान देते हैं, तो हम एक जीते-जागते, खुशहाल इंसान से एक थकी हुई मशीन में बदल जाते हैं.

याद रखिए, एक उदास और लगातार तनाव में जी रही माँ अपने बच्चों को कभी पूरी तरह से खुशहाल और बेफ़िक्र बचपन नहीं दे सकती. बच्चे हमारी बातें कम सुनते हैं, लेकिन हमारी ऊर्जा को बहुत जल्दी पकड़ लेते हैं.

इस तनाव और गिल्ट से बाहर कैसे आएं?

अगर आप भी इस ‘परफ़ेक्ट मॉम सिंड्रोम’ (Perfect Mom Syndrome) का शिकार हैं, तो अपनी मानसिक सेहत को वापस पटरी पर लाने के लिए आज से ही ये 4 क़दम उठाएं:

1. ख़ुद की देखभाल (Self-Care) को प्राथमिकता दें: सेल्फ़-केयर कोई स्वार्थ नहीं है, यह एक ज़रूरत है. हर दिन कुछ समय सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने लिए निकालें. अपनी मनपसंद किताब पढ़िए, अकेले टहलिए, म्यूज़िक सुनिए, मेडिटेशन कीजिए या बस शांति से बैठकर एक कप कॉफ़ी पीजिए. वो करिए जो आपको सुकून और खुशी दें.

2. “ना” कहना सीखिए: घर और बाहर का हर काम परफ़ेक्ट तरीक़े से करना आपकी इकलौती ज़िम्मेदारी नहीं है. जब आप थक जाएं तो “ना” कहना सीखें. परिवारवालों से मदद मांगना कमज़ोरी नहीं, बल्कि समझदारी है.

3. ‘मॉम गिल्ट’ (Mom Guilt) से बाहर आएं: एक दिन बच्चों को टीवी ज़्यादा देख लेने देने या उन्हें बाहर का खाना खिला देने से आप एक ख़राब माँ नहीं बन जातीं. कभी-कभी बच्चों को रोने देना या अपने लिए ‘मी-टाइम’ (Me-Time) लेना बिलकुल ठीक है.

4. थेरेपी या काउंसलिंग का सहारा लें: अगर आप लगातार दुखी, तनावग्रस्त, चिड़चिड़ी या बहुत ज़्यादा थकी हुई महसूस कर रही हैं, तो इसे सामान्य मत मानिए. किसी प्रोफ़ेशनल (काउंसलर या थेरेपिस्ट) से बात करना आपके लिए बहुत फ़ायदेमंद हो सकता है.

ख़ुद से प्यार करना ही सच्ची पेरेंटिंग है

आपकी मानसिक सेहत सीधे आपके बच्चे के जीवन पर असर डालती है. एक खुशहाल, शांत और मानसिक रूप से स्वस्थ माँ ही अपने बच्चे को सही मूल्य और एक सुरक्षित भविष्य दे सकती है.

अच्छी माँ बनने का मतलब ख़ुद को मिटा देना बिलकुल नहीं है. अच्छी माँ बनने का मतलब है ख़ुद से भी उतना ही प्यार करना, ताकि आप अपने बच्चों को भी वो सच्चा और पॉज़िटिव प्यार दे सकें.

इसलिए, अगली बार जब आप एक परफ़ेक्ट माँ बनने के लिए ख़ुद को थकाने लगें, तो आईने के सामने खड़े हों, एक गहरी सांस लें और ख़ुद से कहें, “मैं तब भी एक बहुत अच्छी माँ हूं, जब मैं सबसे पहले ख़ुद का ध्यान रखती हूं.” हैप्पी मदर्स डे! (Happy Mother’s Day)

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