• Zindagi With Richa
  • 10 May, 2026
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माँ बनने में दिक्कत? कहीं इसका कारण आपका थायरॉइड तो नहीं, जानें सच

Ashlesha Thakur

Pregnancy and Thyroid Connection: मदर्स डे (Mother’s Day) का दिन मातृत्व का जश्न मनाने का दिन है. दुनिया की हर महिला का सपना होता है कि वह एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे और उसे गोद में खिलाए. लेकिन आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में कई महिलाओं के लिए ‘माँ बनना’ एक मुश्किल सफ़र बन गया है.

क्या आप जानती हैं कि आपके मां बनने के सपने में गले में मौजूद एक छोटा सा ग्लैंड रुकावट डाल सकता है? जी हां, हम बात कर रहे हैं थायरॉइड (Thyroid) की.

रिप्रोडक्टिव हेल्थ (प्रजनन स्वास्थ्य) और थायरॉइड आपस में बहुत बारीकी से जुड़े हुए हैं. मदर्स डे के इस ख़ास मौक़े पर डॉ. बीना मुक्तेश से कुछ समय पहले हुई बातचीत यहाँ साझा की गई है. आइए समझते हैं कि थायरॉइड और फ़र्टिलिटी के बीच का यह उलझा हुआ रिश्ता क्या है और आप इसे कैसे ठीक कर सकती हैं.

शरीर का ‘कंट्रोल रूम’ है थायरॉइड

थायरॉइड हमारे गले के अंदर तितली के आकार का एक छोटा सा ग्लैंड होता है. यह मेटाबॉलिज़्म को कंट्रोल करने वाले हॉर्मोन बनाता है. आसान भाषा में कहें तो यह हमारे शरीर का इंजन है.

यह ग्लैंड दो बहुत महत्वपूर्ण हॉर्मोन्स, थायरॉक्सिन (T4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) को ब्लड में छोड़ता है. ये हॉर्मोन्स शरीर की ऊर्जा, तापमान और सबसे अहम बात, रिप्रोडक्टिव सिस्टम (प्रजनन तंत्र) को सही तरीके से चलाने का काम करते हैं.

महिलाओं में कितना होना चाहिए नॉर्मल थायरॉइड लेवल?

थायरॉइड फ़ंक्शन का पता लगाने के लिए TSH (थायरॉइड-स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन), T3 और T4 की जाँच की जाती है. एक स्वस्थ महिला के लिए TSH का सामान्य स्तर आमतौर पर 0.4 से 4.0 mIU/L के बीच होना चाहिए. हालाँकि, उम्र और लैब के हिसाब से यह रेंज थोड़ी अलग हो सकती है. इसलिए रिपोर्ट हमेशा डॉक्टर को ही दिखाएं.

थायरॉइड और फ़र्टिलिटी: कहाँ आती है रुकावट?

जब यह ग्लैंड सही से काम नहीं करता, तो मां बनने की प्रक्रिया में कई रुकावटें आने लगती हैं. इसके दो मुख्य प्रकार हैं:

  1. हाइपोथायरॉइडिज़्म (कम एक्टिव थायरॉइड): जब शरीर में थायरॉइड हॉर्मोन कम बनता है, तो इसे हाइपोथायरॉइडिज़्म कहते हैं. डॉ. बीना मुक्तेश बताती हैं, “महिलाओं में इसकी वजह से अनियमित मासिक चक्र, ओव्युलेशन (अंडे का न बनना) की समस्या हो सकती है. इससे एम्ब्रियो इंप्लांट होने में दिक्कत आती है और गर्भपात (Miscarriage) का ख़तरा बढ़ जाता है.” यह सिर्फ़ महिलाओं नहीं, बल्कि पुरुषों में भी स्पर्म की क्वालिटी और गतिशीलता को कम कर सकता है.
  2. हाइपरथायरॉइडिज़्म (ज़्यादा एक्टिव थायरॉइड): जब थायरॉइड हॉर्मोन ज़रूरत से ज़्यादा बनने लगे, तो उसे हाइपरथायरॉइडिज़्म कहते हैं. जिन महिलाओं को यह समस्या है, उन्हें अनियमित पीरियड्स और गंभीर मामलों में एमेनोरिया (माहवारी का पूरी तरह रुक जाना) का सामना करना पड़ सकता है. इन दोनों ही स्थितियों में गर्भधारण करने की संभावना काफ़ी कम हो जाती है.

आईवीएफ़ (IVF) करवा रही हैं? तो रखें ख़ास ध्यान

अगर आप माँ बनने के लिए अस्सिटेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) जैसे इन विट्रो फ़र्टिलाइज़ेशन (IVF) का सहारा ले रही हैं, तो थायरॉइड हेल्थ का सही होना और भी ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है.

स्टडीज़ से पता चलता है कि ‘सबक्लीनिकल हाइपोथायरॉइडिज़्म’ (भले ही TSH सामान्य रेंज के आस-पास हो) आईवीएफ़ की सफलता दर को कम कर सकता है. इसलिए कोई भी फ़र्टिलिटी ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले थायरॉइड लेवल को बिलकुल परफ़ेक्ट करना ज़रूरी है.

रिप्रोडक्टिव सिस्टम को हेल्दी रखने के 4 आसान उपाय

अगर आप कंसीव करने की प्लानिंग कर रही हैं, तो इन बातों का ख़्याल ज़रूर रखें:

  1. सही जांच (Thyroid Function Test): समय-समय पर TSH, फ्री T4 और फ्री T3 की कॉम्प्रिहेंसिव टेस्टिंग कराएं. समय रहते बीमारी का पता चलने से इलाज आसान हो जाता है.
  2. संतुलित पोषण: अपनी डाइट में आयोडीन और सेलेनियम जैसे पोषक तत्वों को शामिल करें. यह थायरॉइड को सही से काम करने की ताक़त देते हैं.
  3. स्ट्रेस से बनाएं दूरी: क्रॉनिक स्ट्रेस यानी लगातार तनाव, थायरॉइड के फ़ंक्शन को बिगाड़ता है. अपने रूटीन में योग, ध्यान (Meditation) और माइंडफ़ुलनेस को शामिल करें.
  4. एक्सपर्ट्स से मिलें: थायरॉइड और फ़र्टिलिटी की समस्या होने पर एक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और एक रिप्रोडक्टिव हेल्थ एक्सपर्ट के साथ मिलकर अपना ट्रीटमेंट प्लान तैयार करें.

मदर्स डे हमें याद दिलाता है कि माँ बनने का सुख दुनिया का सबसे खूबसूरत अहसास है. सही लाइफ़स्टाइल, समय पर जाँच और सही इलाज के साथ आप थायरॉइड को कंट्रोल करके अपने मां बनने के सपने को सच कर सकती हैं. Zindagi with Richa की पूरी टीम की तरफ़ से सभी महिलाओं को हैप्पी मदर्स डे!

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