• Zindagi With Richa
  • 08 March, 2026
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Zindagi With Richa

लेखिका- प्रकृति त्रिपाठी

एक समय था जब किसी लड़की के सपनों की उड़ान को समाज खुद सीमाओं में बांध देता था. उसे बताया जाता था कि उसकी दुनिया कितनी बड़ी हो सकती है और कहां आकर उसे रुक जाना चाहिए.

लेकिन इतिहास हमेशा उन लोगों को याद रखता है जो तय सीमाओं को मानने से इंकार कर देते हैं.

कुछ महिलाएं ऐसी भी हुईं जिन्होंने सिर्फ़ अपने लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ते बनाए. उन्होंने उस दरवाज़े को खोला जिसे समाज ने सदियों से बंद कर रखा था. और यही कारण है कि वह इतिहास में “पहली” बनकर दर्ज हो गईं. आइए यहां पढ़ते हैं भारत की उन पहली महिलाएं के बारे में जो इतिहास रच गईं.

“पहली” होना सिर्फ़ एक उपलब्धि नहीं है. यह उस रास्ते पर पहला कदम होता है जहां पहले कोई रास्ता ही नहीं था. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) के इस अवसर पर आइए आपको बताते हैं भारत की कुछ ऐसी ही साहसी महिलाओं के बारे में, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में पहला कदम रखकर इतिहास रचा.

1. भारत की पहली महिला डॉक्टर: आनंदीबाई जोशी

सबसे पहले बात करते हैं भारत की पहली महिला डॉक्टर आनंदीबाई जोशी की.

19वीं सदी में जब महिलाओं की शिक्षा को महत्व नहीं दिया जाता था, तब आनंदीबाई जोशी ने डॉक्टर बनने का सपना देखा. सामाजिक विरोध और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. वह मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने के लिए अमेरिका गईं और 1886 में डॉक्टर की डिग्री हासिल की. उनकी यह उपलब्धि उस दौर की महिलाओं के लिए एक नई उम्मीद बन गई.

2. भारत की पहली महिला इंजीनियर: ए. ललिता

इंजीनियरिंग की दुनिया में पहला कदम रखने वाली महिला थीं ए. ललिता.

1943 में उन्होंने चेन्नई के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. उस समय इंजीनियरिंग को पूरी तरह पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था, लेकिन ए. ललिता ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती.

3. भारत की पहली महिला IAS अधिकारी: अन्ना राजम मल्होत्रा

प्रशासनिक सेवा में महिलाओं के लिए रास्ता खोलने का काम किया अन्ना राजम मल्होत्रा ने.

1951 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास कर इतिहास रच दिया. हालांकि उस समय कई अधिकारियों का मानना था कि प्रशासनिक ज़िम्मेदारियां महिलाओं के लिए कठिन होंगी. लेकिन अन्ना राजम मल्होत्रा ने अपनी क्षमता और दृढ़ता से यह सोच बदल दी और भारत की पहली महिला IAS अधिकारी बनकर एक नई परंपरा की शुरुआत की.

4. भारतीय सेना की पहली महिला कैडेट: प्रिया झिंगन

भारतीय सेना में महिलाओं के लिए दरवाज़े खोलने वाली एक साहसी महिला थीं प्रिया झिंगन.

1992 में जब भारतीय सेना ने पहली बार महिलाओं को अधिकारी के रूप में शामिल करने का फ़ैसला किया, तब सबसे पहला कदम उठाने वाली महिला थीं प्रिया झिंगन. कहा जाता है कि उन्होंने सेना प्रमुख को पत्र लिखकर एक सवाल पूछा था — “अगर देश की रक्षा करना पुरुषों का अधिकार है, तो महिलाओं को यह अवसर क्यों नहीं मिलना चाहिए.” उनकी इसी दृढ़ता और साहस ने उन्हें भारतीय सेना की पहली महिला कैडेट बना दिया.

5. भारत की पहली महिला फ़ाइटर पायलट: अवनी चतुर्वेदी

आज भारतीय महिलाएं आसमान की ऊंचाइयों को भी छू रही हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं अवनी चतुर्वेदी.

2018 में उन्होंने MiG-21 Bison फ़ाइटर जेट को अकेले उड़ाकर इतिहास रच दिया और भारत की पहली महिला फ़ाइटर पायलट बनीं. उनकी इस उड़ान ने साबित कर दिया कि महिलाओं के लिए आसमान की भी कोई सीमा नहीं है.

एक महिला की उड़ान, पूरे समाज की जीत

ये हैं भारत की वे पहली महिलाएं जिन्होंने इतिहास के सुनहरे पन्ने में अपना नाम दर्ज कराया. इन सभी कहानियों में एक बात समान है. इन महिलाओं ने सिर्फ़ अपनी सफलता की कहानी नहीं लिखी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ते भी खोले.

इतिहास में “पहली” बनने वाली महिलाएं सिर्फ़ एक मुकाम हासिल नहीं करतीं, वे पूरे समाज की सोच बदल देती हैं. और शायद इसी लिए हर महिला दिवस हमें यह याद दिलाता है कि जब एक महिला आगे बढ़ती है, तो उसके साथ पूरा समाज भी आगे बढ़ता है.

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